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उत्तराखंड के गढ़वाल में मचंन किए जाने वाली रामलीला पौराणिक व परंपरागत होने के कारण अलग पहचान रखती है। साथ ही यहां की रामलीला से कई मान्यतायें भी जुड़ी हुई है। यहां हर साल रामलीला का आयोजन किया जाता है।

चमोली जिले के डिम्मर गांव में 106वीं बार रामलीला मंचन का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला मंचन की शुरुआत श्री हरिनारायण विष्णु की आरती और रामजन्म के साथ हुई। मंचन में रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की तपस्या से लेकर राम जन्म तक की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान 90 वर्षीय मोहन प्रसाद डिमरी ने दशरथ की भूमिका का जीवंत मंचन कर दर्शकों का मन मोहन लिया। उन्होंने ऐतिहासिक रामलीला मंचन को सुचारु रूप से संपादित करने का आह्वान किया।
90 साल के मोहन निभा रहे हैं दशरथ का किरदार
रामलीला में रावण ब्रह्म देव की तपस्या कर मन वांछित वरदान प्राप्त करता है और इसके बाद कैलाश पर्वत हिला देता है। वहीं दशरथ की ओर से किए गए यज्ञ के प्रभाव से उनके घर राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न का जन्म होता है। रघुकुल में एक साथ चार सुकुमारों के जन्मोत्सव पर वेद ऋचाएं होती हैं। साथ ही अनुपम रंग भूमि में जुगल जोड़ी के दर्शन हैं…, घराना हो तो ऐसा हो… भजन गाए।
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